शिव की उपासना एवम् श्रावण मास

हमारे देश में विभिन्न प्रकार की ऋतुऍ पायी जाती हैं, और सभी ऋतुओं का स्वागत हम बड़े ही उत्साह के साथ करते हैं, शरद ऋतु में नवरात्र मनाते हैं, तो ग्रीष्म में शीतला माता की उपासना करते हैं। वर्षा ऋतु में शिव की आराधना को सर्वोपरि माना गया है, सम्भवत: शिव को बरसात में उत्पन्न होने वाली बीमारियों एवं विषैले कीट सर्पा आदि से रक्षा करने में सक्षम समझा गया है। इसलिए शिव की आराधना ऋग्वेद में भी की गई है – मिला नो रुद्रोत नो मयस्कृधि क्षयद्वीराय मनसा विधेमते ।
यच्छं च योश्च मनुरायेजे पिता तदश्याम तव रुद्र पर्णीतिणु।।
(अष्टम अध्याय-114 सूक्त श्लोक-2)
अर्थात् यज्ञ द्वारा मनु को प्राप्त होने वाले हे रुद्र! तू हमें सुखी, स्वस्थ एवं निरोग रखे तथा मनुष्य का पालन करते हुए शांति और रोग प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करे। हे वीरों को आश्रय देने वाले! हम तुम्हें नमन करतें हैं तथा श्रेष्ठ नीतियों से युक्त पथ पर गमन करते हैं।
हमारे देश में शिव का स्थान अद्वितीय है। साथ-साथ अत्यंत लोकप्रिय भी शिव में एक विशेषता है, कि वह अर्धनारीश्वर हैं, सम्भवत: इसलिए इतने भोले एवम् सरल हैं, साधारण जल व धतूरे से भी वह जल्द प्रसन्न हो जाते हैं, उनके अन्दर स्त्री की निर्माण शक्ति एवं कलात्मकता है, तो पुरुष की श्रम शक्ति और जब इनका संयोग होता है तो एक मानवीय विभूति का जन्म होता है। ऋग्वेद में शिव को एक शक्तिशाली देवता के रूप में पूजा गया है–दृदेवो वराहमरूषं कपर्दिनं त्वेषं रूपं नमसा नि हृदयामहे।
हस्ते विभ्रद् भेषज वार्याणि शर्म वर्म च्छदिस्मभ्यं यंस्त्।।
(अध्याय-8सूक्त -114 श्लोक 5)
हमें मानसिक शांति और बाहरी रोगों को दूर करने की क्षमता प्रदान करने वाले, हमारे शरीरों में समाहित विषों को बाहर निकालने वाले, सात्विक आहार ग्रहण करने वाले, दीप्ति युक्त ,सुन्दर रूप वाले ,जटाधारी पराक्रमी रुद्र को हम आवाहित करते हैं। वह अपने हाथों में आरोग्य वर्धक औषधियों को धारण कर आकाश से आगमन करे।

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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