जल जीवन का अमृत फल है-1

जल जीवन का अमृत फल है, यह सभी प्राणियों के लिए आवश्यक है प्राचीन काल से ही भारतीय सभ्यता में जल की उपयोगिता को समझा गया था इसलिए नदियों की आराधना की जाती थीं और उन्हें ईश्वर के समकक्ष रखा गया था। विश्व की सभी प्रमुख सभ्यताए नदियों के किनारों पर ही विकसित हुई इसलिए नदियों को पूज्य माना गया था जल ही जीवन है यह उक्ति हम वर्षों से सुनते आ रहे हैं। विभिन्न परीक्षाओं में जल के संचयन एवम् प्रदूषण पर वर्षों से निबंध लिखते आ रहे हैं, परन्तु क्या हमने अपने जीवन में इस जल को संग्रहीत किया? प्रदूषण मुक्त होने से बच पाये? नहीं आखिर कब तक यह उक्ति बन कर रहेगा क्या वास्तव में हम जल संरक्षण का कोई उपाय कर रहे हैं? शायद बहुत से लोगों का उत्तर “न” में होगा। आज आधुनिक भारत के महानगरों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो रहा है तथा गांवों में भी कमोवेश यही दशा हो रही है जीवदायिनी नदियां चाहे वह बड़ी हो या छोटी सभी प्रदूषित हो चुकी हैं ।शायद ही कोई नदी हो जो अब भी अविरल बह रही हो आखिर इसका जिम्मेदार कौन है ?क्या यही प्रगति है? प्रगति का अर्थ होता है कि हम अपने समाज एवं संसाधनों को उन्नत बनाए क्या हमने अपने एक महत्वपूर्ण संसाधन जल को नष्ट नहीं कर दिया? आज समस्त विश्व में जल दिवस मनाया जाता है, एक दिन मना कर हम अपने जल भन्डार को सुरक्षित रख पा रहे हैं????……..

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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