यज्ञ प्रक्रिया स्वतः संचालित है और प्रकृति द्वारा निरंतर संपादित होती रहती है ।सूर्य द्वारा वर्षा चक्र तो वायु द्वारा जीवन वायु और पृथ्वी में एक बीज हजारों फलों का प्रदाता बन जाता है ।इस दिव्य यज्ञ प्रक्रिया के अनुकरण से लोक में द्रव्य यज्ञ का प्रचलन है जिसका याजक देवता के प्रति अपनी सर्वाधिक प्रिय वस्तु की आहुति दे कर उससे कई गुना उपयोगी सामग्री प्राप्त कर लेता है ।यही दो और लो का सिद्धांत है ।

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Simple but effective…
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Awesome language…😊
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Aadhunikta ne hi prakriti ka vinash kiya hai.
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