आधुनिकता और प्रकृति

यज्ञ प्रक्रिया स्वतः संचालित है और प्रकृति द्वारा निरंतर संपादित होती रहती है ।सूर्य द्वारा वर्षा चक्र तो वायु द्वारा जीवन वायु और पृथ्वी में एक बीज हजारों फलों का प्रदाता बन जाता है ।इस दिव्य यज्ञ प्रक्रिया के अनुकरण से लोक में द्रव्य यज्ञ का प्रचलन है जिसका याजक देवता के प्रति अपनी सर्वाधिक प्रिय वस्तु की आहुति दे कर उससे कई गुना उपयोगी सामग्री प्राप्त कर लेता है ।यही दो और लो का सिद्धांत है ।

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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