गुरुकुल शिक्षा पद्धति

प्राचीन भारत में शिक्षा का बहुत ही ज्यादा महत्व था। प्राचीन भारत में लोग शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजते थे। गुरुकुल शिक्षा पद्धति हमारे भारतीय समाज में प्राचीन काल से चली आ रही है। प्राचीन काल में आजकल की तरह विद्यालय नहीं होते थे, परंतु लोग गुरु के घर पर रह कर ही शिक्षित होते थे। 6 ,11 ,15 वर्ष की आयु के बालक एवं बालिकाएं गुरुकुल जाकर शिक्षा ग्रहण करते थे। यह शिक्षा सिर्फ पुस्तकीय नहीं होती थी, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में आने वाली सभी जरूरी कार्यों के बारे में होती थी। जैसे उसे समय पशुपालन, कृषि आदि प्रमुख कार्य थे। अतः बालकों को इन सब में पारंगत बना दिया जाता था। उन्हें धर्म, उपनिषद, कला, दर्शन के साथ-साथ ही स्किल्ड भी बनाया जाता था। गुरुकुल आश्रम अनादि काल से भारत के लोगों को शिक्षित करते आ रहे हैं जहां श्री राम ने वशिष्ठ मुनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की तो वहीं श्री कृष्ण ने संदीपन के यहां। गुरुकुल के इतिहास में भारत के शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान विज्ञान की रक्षा का इतिहास समाहित है।

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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