यदि तिल भर विश्व की नियमितता भंग हो जाए तो सारा ब्रह्मांड दहकते सूर्यकुंड में गिरकर भस्म हो जाय।प्रकारांतर से न्यूटन की भी मान्यता है कि विश्व ऋत से संचालित और अनुशासित है ।व्यापक अर्थ में ऋत् का आदॆश है ।जहां सभी घटक एक दूसरे के उपकारक हैं ।इसलिए समंपूणॆ अस्तित्व की सुरक्षा हेतु आदिकाल से लेकर आज तक संतुलित पर्यावरण चिंतन का प्रतिपाद्य रहा।पर्यावरण का संरक्षण ही प्रकृति का संतुलन है और मानव अस्तित्व की सुरक्षा भी ।

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प्रकृति चिंतन से ही आत्म ज्ञान संभव है।
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It’s true
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