पुराणों में “Evolution”

भारतीय परंपरा में वेद एवं पुराणों की बड़ी महिमा है। पुराणों में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों का बहुत ही सुंदर निरूपण हुआ है और चारों का एक दूसरे के साथ संबंध है। इसे भली भांति समझाया गया है। वेदों की भांति पुराण भी हमारे यहां अनादि माने गए हैं। पुराणों में पद्म पुराण का स्थान बहुत ही ऊंचा है। पद्म पुराण में विष्णु भगवान का महात्म बताया गया है। इसके साथ ही हम यह कह सकते हैं कि यह क्रम विकास (evolution) की भी एक झलक प्रस्तुत करता है। जैसे की श्रृष्टि खंड में उल्लेखित एक कथा के अनुसार मनु के जेष्ठ पुत्र ‘इल’ रथ में बैठकर भगवान शंकर के महान उपवन में गए, जो कल्प वृक्ष की लताओं से व्याप्त एवं शरवन के नाम से प्रसिद्ध था। उसमे भगवान शिव पार्वती जी के साथ क्रीड़ा करते हैं। पूर्व काल में महादेव जी ने उमा के साथ सरवन के भीतर प्रतिज्ञा पूर्वक ये बात कही थी कि पुरुष नामधारी जो कोई जीव यहां प्रवेश करेगा वो स्त्री रूप हो जाएगा। यह बात इल को नहीं पता थी अतः वो अपने घोड़े के साथ इस सरवन मैं प्रवेश कर गए और वह स्त्री रूप हो गए और घोड़ा भी घोड़ी हो गया। इल के भाई इक्ष्वाकु को जब यह पता चला तो उन्होंने शिव पार्वती की स्तुति की तब वह प्रकट होकर बोले मेरी यह प्रतिज्ञा तो नही टल सकती। परंतु इक्ष्वाकु अश्वमेध यज्ञ करे और उसका संपूर्ण फल हम दोनो को अर्पण करें तो इल किंपुरुष हो जाएंगे। उनकी बात सुनकर इक्ष्वाकु ने वैसा ही किया जिससे इल एक महीने पुरुष एवं एक महीने स्त्री रूप मैं रहने लगे। आज के युग मैं देखें तो मोलुस्का (phylum – mollusca) का जीव घोंघा (snail) भी कुछ समय पुरुष और कुछ समय स्त्री रूप में रहता है इस प्रक्रिया को hermaphroditism कहते हैं, संभवतः पुराण मैं इस प्रक्रिया को इस कथा द्वारा समझने कि कोशीश की गई है।

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Kumud Poorvi

कुमुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरा छात्रा हैं। एम.एड. की शैक्षिक योग्यता। अनेक पुस्तको
एवं लेखों का प्रणयन। पर्यावरणीय जागरूकता एवं ग्रामीण क्षेत्र मे गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा
के प्रचार में रत।

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